जयशंकर प्रसाद के नाटक 'चन्द्रगुप्त' में चाणक्य के संवाद हैं : A. शत्रु की उचित प्रशंसा करन...
आचार्य रामचंद्र शुक्ल की पुस्तक 'त्रिवेणी' में निम्न कवियों पर निबंध संकलित हैं :