"बिना दुख के सब निस्सार, बिना आँसू के जीवन भार, दीन दुर्बल है रे, संसार इसी से दया, क्षमा...
आचार्य रामचंद्र शुक्ल द्वारा लिखित और संपादित रचनाओं को, प्रथम प्रकाशन वर्ष के अनुसार, पहल...