मानुस प्रेम भएउँ बैकुंठी। नाहिं त काह छार भरि मूठी। पद्मावत में यह कथन किसके द्वारा कहा गय...
कला के किस क्षण से फैण्टेसी साहित्यिक कलात्मक अभिव्यक्ति का रूप धारण करने लगती है?